Friday, 11 March 2011

पैसों की दुनिया

पैसों की इस दुनिया में सब कुछ बेचा जाता है,
पैसों के दरबार में हर कोई शीष झुकाता है,
जो मोल लगाए सही-सही,
वो सब कुछ पाता जाता है,
पैसों की इस दुनिया में सब कुछ बेचा जाता है।
बेटों का यहां भाव लागकर,
पैसा दबाया जाता है,
बहू-बेटी को बेच यहां,
माल कमाया जाता है,
पैसों की इस दुनिया में सब कुछ बेचा जाता है।
हर सत्ता के गलियारे में,
पैसों का परचम लहराता है,
नोटों के सम्मान में,
ईमान तक बिक जाता है,
पैसों की इस दुनिया में सब कुछ बेचा जाता है।
समझदारों की इस दुनिया में,
पैसा ही हर दम गाता है,
ईश्वर भक्ति को भी अब,
पैसों से तोला जाता है,
पैसों की इस दुनिया में सब कुछ बेचा जाता है।
सिक्कों की खनक से,
बच्चा भी मुस्काता है,
आटे की लेई छोड़,
नोट उसे अब भाता है,
पैसों की इस दुनिया में सब कुछ बेचा जाता है।
देख सच्चाई दुनिया की मैं,
अब घबरा सा जाता हंू,
जीने की तलाश में,
मौत बेच कर आता हूं,
पैसों की इस दुनिया में सब कुछ बेचा जाता है।
पैसों के जंजाल में,
हर कोई फंसता जाता है,

धन की कोरी चाहत में,
रोज़ ठगा कोई जाता है,
पैसों की इस दुनिया में सब कुछ बेचा जाता है।
देख दस्तूर दुनिया का,
मैं चकित रह जाता हूं,


धनवानों के जोर के आगे,
चुप्पी साधे रह जाता हूं,
पैसों की इस दुनिया में सब कुछ बेचा जाता है।
पैसों के दरबार में हर कोई शीष झुकाता है,
जो मोल करे पैसे का, वहीं बुद्धिजीवी कहलाता है।
अक्षय मिश्रा
 
 

3 comments:

वृजेश सिंह said...

haan ye sach to hai
magar sabkii sacchaiinahii
ummeed-e-kiran bhii raushan hai
hamare jehan me kahin
isliye itni vyatha hoti hai
varna hum bhii aaram se
chain kii banshii bajate mere dost.
fantastic..keep it up.

जितेन्द्र देव पाण्डेय 'विद्यार्थी' said...

हाँ इसीलिए तो कहा गया है'कहे पैसे पे इतना गरूर करे है

अंतर्मन said...

dost baap na bhaiyaa sabse bada rupaya..waise aapne kaffi achhi kavita likhi hai