नौ महीने गर्भ में रखकर, जिसको मैंनें जन्म दिया।
अपने स्तन का दूध पिलाकर, जिसको मैंनें कर्म दिया।
ममता के धागें में,संस्कार के मोती पिरोकर, जिसे मैंनें बड़ा किया।
वो प्रतिमूर्ति है मेरी, जिसने मुझे बेघर किया।
लाख वेदना झेली दिल ने, अब न दम इसमें बाकी है।आंख सूख गई, कमर झुक गई, अब लाठी मेरी साथी है।
समय के काल च्रक में, पल वो बीते ढूंढ रही हूं।
उम्मीदों के कोने में, थोड़ी आस बाकी है।
बड़े दिनों बाद उसे, मेरी याद आई है।
बीमारी के समाचार से, घर में रौनक आई है।
बच्चों की धमाचौकड़ी, मुझे बड़ा हंसाई है।
इस बेजान बुढिय़ा में, अब फिर से जान आई है।
बीमारी के समाचार से, घर में रौनक आई है।
बच्चों की धमाचौकड़ी, मुझे बड़ा हंसाई है।
इस बेजान बुढिय़ा में, अब फिर से जान आई है।
बेटा पूछे मां तू कैसी, पोता दूध पिलाता है।
बहू की सेवा देख, दिल भी पिघल जाता है।
पकवानों ने घर को फिर से महकाया है।
परिवार का साथ देख, दिल मेरा भर आया है।
बहू की सेवा देख, दिल भी पिघल जाता है।
पकवानों ने घर को फिर से महकाया है।
परिवार का साथ देख, दिल मेरा भर आया है।
मेरे मरने चिंता सबको बड़ा सताई है।
बची कमाई पर सबने आंख गड़ाई है।
बहू देखे जेवर, बेटा सोचे धन कहां,
बूढिय़ा को फूंकने, जल्दी सब पे आयी है।
बची कमाई पर सबने आंख गड़ाई है।
बहू देखे जेवर, बेटा सोचे धन कहां,
बूढिय़ा को फूंकने, जल्दी सब पे आयी है।
मेरे दिल की बलि चढ़ गई।
घर में बजी बधाई।
सबकी काली नियत सेे,
कालिख मुझ पर आयी।
घर में बजी बधाई।
सबकी काली नियत सेे,
कालिख मुझ पर आयी।
5 comments:
खूबसूरत
well done
.............
AACHI KAVITA HAI. TUMNE SACH MEIN MA KE DARD KO BAHUT HI KHOOBSURTI SE BAYA KIYA HAI.
ALL THE BEST FOR WRITING SUCH POEMS IN FUTURE!!
bahut khubsurti s tmne is kavita k likha haiz........
maa too maan hi hoti hai.. unka dard aaj tak kauin samjh paya hai.. mager woo sabka dard samjh jatti hainn
:)
Post a Comment